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प्रारंभिक अवस्था के कैंसर रोगियों में नियंत्रण का स्थान (Locus of Control) एवं जीवन की गुणवत्ता

Author(s): शिक्षक मनोविज्ञान, पी. एम. श्री बसंत 10+2 उच्च विद्यालय, इतिम्हा कर्मा, ब्लॉक नासरीगंज, रोहतास (बिहार)   DOI: 10.70650/rvimj.2026v3i10020   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i10020
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download

सारांश: नियंत्रण का स्थान एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक अवधारणा है, जो यह दर्शाती है कि व्यक्ति अपने जीवन की घटनाओं को किस हद तक अपने व्यक्तिगत नियंत्रण (आंतरिक नियंत्रण) के अंतर्गत मानता है या फिर उन्हें भाग्य, संयोग अथवा अन्य शक्तिशाली बाहरी कारकों (बाह्य नियंत्रण) के प्रभाव में मानता है। कैंसर के संदर्भ में, विशेषकर रोग के प्रारंभिक चरण में, नियंत्रण का स्थान रोगियों के मनोवैज्ञानिक अनुकूलन, सामना करने की रणनीतियों तथा समग्र जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान अध्ययन का उद्देश्य प्रारंभिक अवस्था के कैंसर रोगियों में नियंत्रण के स्थान और जीवन की गुणवत्ता के बीच संबंध का अध्ययन करना है। इस अध्ययन में क्रॉस-सेक्शनल शोध अभिकल्प का उपयोग किया गया। प्रारंभिक अवस्था के कैंसर से पीड़ित तथा उपचाराधीन रोगियों से मानकीकृत नियंत्रण-स्थान मापन पैमानों एवं जीवन-गुणवत्ता मापन पैमानों के माध्यम से आँकड़े एकत्र किए गए। जीवन की गुणवत्ता का मूल्यांकन शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कार्यक्षमता, सामाजिक संबंध तथा भूमिकात्मक प्रदर्शन जैसे विभिन्न आयामों में किया गया। परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि जिन रोगियों में आंतरिक नियंत्रण का स्थान प्रमुख था, उनकी समग्र जीवन-गुणवत्ता उन रोगियों की तुलना में अधिक पाई गई, जिनमें बाह्य नियंत्रण का स्थान प्रमुख था। आंतरिक नियंत्रण वाले रोगियों में बेहतर भावनात्मक समायोजन, उपचार के प्रति अधिक अनुपालन तथा स्वस्थ होने के प्रति अधिक आशावादी दृष्टिकोण पाया गया। इसके विपरीत, बाह्य नियंत्रण वाले रोगियों में चिंता, असहायता की भावना तथा अनुभूत जीवन-कल्याण में कमी अधिक देखी गई। यह अध्ययन कैंसर देखभाल में मनोवैज्ञानिक कारकों के महत्व को रेखांकित करता है तथा यह स्पष्ट करता है कि नियंत्रण का स्थान रोग के प्रारंभिक चरणों में एक सुरक्षात्मक मनोवैज्ञानिक संसाधन के रूप में कार्य कर सकता है। रोगियों की नियंत्रण संबंधी मान्यताओं को समझकर स्वास्थ्य-सेवा पेशेवर लक्षित मनोसामाजिक हस्तक्षेप विकसित कर सकते हैं, जो आंतरिक नियंत्रण को सुदृढ़ करने, सामना करने की क्षमताओं को बढ़ाने तथा अंततः जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हो सकते हैं। चिकित्सा उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक सहयोग को एकीकृत करना अधिक समग्र एवं रोगी-केन्द्रित कैंसर देखभाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।

मुख्य शब्द: आंतरिक नियंत्रण स्थान, रोगियों की समझ, आत्म-नियंत्रण, चिकित्सा उपचार, भावनात्मक संतुलन।.


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