Published Date: 10-05-2026 Issue: Vol. 3 No. 5 (2026): May 2026 Published Paper PDF: Download
सारांश: वर्तमान अध्ययन “तेजी से बदलती दुनिया में स्थिरता के लिए आजीवन सीखना” विषय पर आधारित है, जिसमें कानपुर जनपद की महिला शिक्षिकाओं के संदर्भ में आजीवन अधिगम के विभिन्न आयामों का विश्लेषण किया गया है। आधुनिक युग में तकनीकी, सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तनों की तीव्रता ने शिक्षा के स्वरूप को व्यापक रूप से प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप निरंतर सीखना एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य महिला शिक्षिकाओं में आजीवन सीखने की जागरूकता, व्यवहारिक प्रवृत्तियों, डिजिटल माध्यमों के उपयोग, सीखने में आने वाली बाधाओं तथा स्थिरता पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन करना है। अध्ययन के लिए वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अनुसंधान पद्धति अपनाई गई, जिसमें प्राथमिक डेटा के संकलन हेतु 25 महिला शिक्षिकाओं पर आधारित एक संरचित प्रश्नावली का उपयोग किया गया। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत एवं आवृत्ति के माध्यम से किया गया। परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश शिक्षिकाएँ आजीवन सीखने की अवधारणा से परिचित हैं तथा वे इसे अपने पेशेवर एवं व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक मानती हैं। डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ रहा है, किन्तु तकनीकी संसाधनों की कमी एवं डिजिटल विभाजन अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि समय की कमी और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ महिला शिक्षिकाओं के लिए प्रमुख बाधाएँ हैं। इसके बावजूद, अधिकांश शिक्षिकाएँ भविष्य में भी निरंतर सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि आजीवन सीखना न केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता, सामाजिक समावेशन तथा आर्थिक स्थिरता को भी सुदृढ़ करता है। उचित नीतिगत हस्तक्षेप एवं संसाधनों की उपलब्धता से इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
मुख्य-शब्दः आजीवन सीखना, महिला शिक्षिकाएँ, स्थिरता, शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, नई शिक्षा नीति 2020, जागरूकता, पेशेवर विकास, सामाजिक समावेशन, आर्थिक स्थिरता.