Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download
आरंभिक अनुच्छेद: भारत में ब्रिटिश प्रशासन खासकर भारत में उन्हीं उद्योगों को बढ़ावा दिया जो इंग्लैण्ड में पनप रहे उद्योगों को सुविधाजनक रूप से कच्चे माल उपलब्ध करा सकें। बिहार बंगाल का सूबा होने के कारण यह ब्रिटिश प्रशासन के सीधे अधिकार क्षेत्र में पड़ता था। बंगाल ब्रिटिश प्रशासन का राजधानी भी हुआ करती थी। बिहार में अंगेजों ने अफीम, शौरा, नील, चीनी और चाय के व्यापार में अभिरूचि ली तथा इस व्यवसाय को बढ़ावा दिया। इसके बाद उन्होंने सूती वस्त्र, लाह, रेशमी वस्त्र, जूट, पटसन, लोहा, कोयला, एवं रेलवे में अपना ध्यान केन्द्रित किया। कपास, जूट, पटसन, नील, लाह इत्यादि की खेती खासकर तिरहुत, भागलपुर एवं मगध कमिश्नरी में ज्यादा होती थी। इसलिए यहाँ के लघु एवं कुटीर उद्योग ज्यादा प्रभावित हुए। अंग्रेज इन सभी चीजों का कच्चा माल खरीदकर इंग्लैण्ड भेज देते थे। जिसका परिणाम यह हुआ कि इस व्यवसाय से जुड़ी देशी एवं लघु कुटीर उद्योग का पतन होना शुरू हुआ क्योंकि उन्हें कच्चे माल की प्राप्ति नहीं हो पा रही थी। मिलों से बनकर सामग्री भारत में आकर छा जाते थे तथा वे सस्ते दामों पर बिकने के कारण बिहार के बाजार में छा गये थे। सस्ते होने के कारण सामान्य लोग इसका उपयोग अधिक से अधिक करने लगे। इस प्रतिस्पर्धा में बिहार के परंपरागत लघु एवं कुटीर उद्योग समाप्ति की ओर अग्रसर होने लगे।