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वर्तमान समय में वृद्ध विधवाओं की समस्या

Author(s): बालिका कांबळे, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, श्री कुमारस्वामी महाविद्यालय, औसा, लातूर (महाराष्ट्र)   DOI: 10.70650/rvimj.2026v3i1001   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2026v3i1001
Published Date: 10-01-2026 Issue: Vol. 3 No. 1 (2026): January 2026 Published Paper PDF: Download

आरंभिक अनुच्छेद: वर्तमान समय में वृद्धजनों की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है। सम्पूर्ण विश्व में एक आकलन के अनुसार 60 वर्ष के ऊपर उम्र वालों में जनसंख्या के हिसाब से भारतवर्ष चौथे स्थान पर है। वृद्ध पुरुष तो ऐने-केन प्रकारेण परिवार में अपनी गुजर-बसर कर लेता है, परन्तु वृद्ध महिला का जीवन वृद्ध पुरुष की अपेक्षा अधिक कष्टमय है। इसका कारण यह है कि वृद्ध स्त्रियाँ शारीरिक असक्षमता के कारण की चहारदीवारी के अन्दर ही कैद जिन्दगी व्यतीत करने के लिए विवश होती हैं। इसका एक कारण यह भी है कि परम्परागत रूप से हमारा समाज पुरुष प्रधान रहा है जिसमें स्त्री दोयम दर्जे के रूप में स्थित रही है। यही कारण है कि उसे पुरुष की अपेक्षा अत्यधिक पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।


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