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गाँधी के स्वाधीनता आन्दोलन में काँग्रेस की भूमिका

Author(s): डॉ० सन्नी कुमार, पी-एच०डी०, राजनीति विज्ञान विभाग, बी0एन0एम0यू0, मधेपुरा.
Published Date: 05-10-2025 Issue: Vol. 2 No. 10 (2025): October 2025 Published Paper PDF: Download

सारांश: राष्ट्रवाद के इतिहास में प्रायः एक अकेले व्यक्ति को राष्ट्र-निर्माण के साथ जोड़कर देखा जाता है। उदाहरण के लिए, हम इटली के निर्माण के साथ गैरीबाल्डी को, अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के साथ जॉर्ज वाशिंगटन को और वियतनाम को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के संघर्ष से हो ची मिन्ह को जोड़कर देखते हैं। इसी तरह महात्मा गाँधी को भारतीय राष्ट्र का ’पिता’ माना गया है। चूँकि गाँधी जी स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लेने वाले सभी नेताओं में सर्वाधिक प्रभावशाली और सम्मानित हैं अतः उन्हें दिया गया उपर्युक्त विशेषण गलत नहीं है। हालाँकि, वाशिंगटन अथवा हो ची मिन्ह की तरह महात्मा गाँधी का राजनीतिक जीवन-वृत्त उस समाज ने ही सँवारा और नियंत्रित किया, जिस समाज में वे रहते थे। कोई व्यक्ति चाहे कितना ही महान क्यों न हो वह न केवल इतिहास बनाता है बल्कि स्वयं भी इतिहास द्वारा बनाया जाता है।

मुख्य शब्दः: राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता, राजनीतिक, समाज।


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