औपनिवेशिकता से मुक्ति की ओर: आदिवासी शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में बिरसा मुंडा का समावेश
Published Date: 31-10-2025 Issue: Vol. 2 No. 10 (Special issue): October 2025 Published Paper PDF: Download
सारांश: भारतीय शिक्षा की औपनिवेशिक विरासत ने ऐतिहासिक रूप से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, आदिवासी इतिहास और समुदाय-आधारित शिक्षण पद्धतियों को वंचित किया ।है। प्रस्तुत शोध-पत्र, जिसका शीर्षक है “औपनिवेशिकता से मुक्ति की ओर: आदिवासी शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में बिरसा मुंडा का समावेश”, आलोचनात्मक रूप से इस संभावना की जाँच करता है कि किस प्रकार बिरसा मुंडा - स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और जनजातीय नेता -की विरासत को जनजातीय समुदायों की शैक्षिक पाठ्यचर्या में समाहित किया जा सकता है। उपनिवेश-विरोधी सिद्धांत, स्वदेशी शिक्षा मॉडल तथा नीतिगत विश्लेषण पर आधारित यह अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि शिक्षा सांस्कृतिक पहचान की पुनःप्राप्ति, सामुदायिक मूल्यों की सुदृढ़ता तथा ज्ञानात्मक प्रभुत्व के प्रतिरोध को प्रोत्साहित करने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शोधपत्र यह तर्क प्रस्तुत करता है कि बिरसा मुंडा के योगदान को जनजातीय शिक्षा के ढाँचे में शामिल करना उपनिवेशी और मुख्यधारा की प्रस्तुतियों के विरुद्ध एक प्रतिप्रवृत्ति (काउंटर-नरेटिव) के रूप में कार्य कर सकता है, साथ ही जनजातीय युवाओं में जीवन कौशल, आलोचनात्मक चेतना और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में भी सहायक हो सकता है। कार्यविधि की दृष्टि से यह अध्ययन शैक्षिक नीतियों, आदिवासी अध्ययन साहित्य तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत पाठ्यचर्या रूपरेखाओं की सामग्री-विश्लेषण पर आधारित है। निष्कर्ष इंगित करते हैं कि आदिवासी शिक्षण पद्धति में बिरसा मुंडा की विरासत का समावेश एक अधिक समावेशी, पहचान-समर्थक और रूपांतरणकारी शैक्षिक वातावरण निर्मित करने की क्षमता रखता है। अंततः यह शोध-पत्र निष्कर्ष निकालता है कि पाठ्यक्रम डिज़ाइन, शिक्षक प्रशिक्षण और सामुदायिक भागीदारी के लिए ऐसे सुझाव दिए जाएँ जो भारत में शिक्षा को उपनिवेश-मुक्त बनाने के व्यापक परियोजना के अनुरूप हों।
मुख्य शब्द: औपनिवेशिकता से मुक्ति, बिरसा मुंडा, आदिवासी शिक्षा, स्वदेशी ज्ञान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पाठ्यचर्या रूपरेखा.