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विनोबा भावे एवं भूदान आन्दोलन

Authors: अंजन लकड़ा, रिसर्च स्कॉलर, राजनीति विज्ञान विभाग, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हज़ारीबाग, झारखंड.   DOI: 10.70650/rvimj.2025v2i800026   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2025v2i800026
Published Date: 12-08-2025 Issue: Vol. 2 No. 8 (2025): August 2025 Published Paper PDF: Download

सारांश: विनोबा भावे आधुनिक भारत के महान आध्यात्मिक नेताओं और सुधारकों में से एक थे, जिन्हें अनगिनत भारतीयों ने प्यार किया था। 1895 में जन्मे विनोबा ने दस साल की छोटी उम्र में आजीवन ब्रह्मचर्य और निस्वार्थ सेवा की शपथ ली। और फिर वे गांधी से मिले और स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष में शामिल हो गए। 1940 में गांधी ने विनोबा को ब्रिटिश शासन के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध की पेशकश करने के लिए पहला सत्याग्रही चुना। विनोबा ने अन्य धर्मों का भी सम्मान किया और उनका अध्ययन किया। विनोबा का जीवन एक महान व्यक्ति की सद्भावना और अहिंसा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और प्रेम की शक्ति को दर्शाता है। भारत की आज़ादी के बाद जब गांधी के विचार लोगों की याददाश्त से फीके पड़ने लगे, तो विनोबा ने अपना “भूदान“ आंदोलन शुरू किया। और बीस साल की अवधि में, उन्होंने पूरे भारत में पैदल यात्रा की। जमींदारों को अपनी ज़मीन ग़रीब लोगों को देने के लिए राजी किया और उन्होंने सफलतापूर्वक चार मिलियन ज़मीन ग़रीब लोगों में वितरित की। इस पत्र के अंतर्गत विनोबा भावे एवं भूदान आंदोलन पर विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

मुख्य-शब्द: भूदान आंदोलन; जीवन दर्शन; लोकहितकारी चिंतन; गाँधीवादी विचारधारा।.


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