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सोशल मीडिया उपयोग की अवधि और कॉलेज छात्रों में चिंता एवं अवसाद के स्तर के बीच संबंध

Authors: डॉ0 विश्वजीत भारतीय, शिक्षक (मनोविज्ञान), पी. एम. श्री बसंत 10$2 उच्च विद्यालय, इतिम्हा कर्मा, ब्लॉक नासरीगंज, रोहतास, बिहार   DOI: 10.70650/rvimj.2025v2i800022   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2025v2i800022
Published Date: 11-08-2025 Issue: Vol. 2 No. 8 (2025): August 2025 Published Paper PDF: Download

सारांश: सोशल मीडिया के तीव्र विस्तार ने कॉलेज छात्रों के दैनिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है, जिससे उनके संचार के तरीके, शैक्षणिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। यह अध्ययन कॉलेज छात्रों में सोशल मीडिया उपयोग की अवधि और चिंता (।दÛपमजल) तथा अवसाद के स्तरों के बीच संबंध की जाँच करता है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि क्या सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताना मानसिक तनाव में वृद्धि से जुड़ा है। यह अध्ययन मात्रात्मक शोध पद्धति पर आधारित है, जिसमें विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले कॉलेज छात्रों से संरचित प्रश्नावली के माध्यम से डेटा एकत्र किया गया। सोशल मीडिया उपयोग की अवधि को प्रतिदिन औसत घंटों में मापा गया, जबकि चिंता और अवसाद के स्तरों का आकलन मानकीकृत मनोवैज्ञानिक मापनी (स्केल) के माध्यम से किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि लंबे समय तक सोशल मीडिया के उपयोग और चिंता एवं अवसाद के बढ़े हुए स्तरों के बीच एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संबंध है। जिन छात्रों ने प्रतिदिन अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने की रिपोर्ट की, उनमें बेचौनी, उदासी, नींद में बाधा तथा एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण अधिक पाए गए। ऑनलाइन तुलना, ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ साइबर बुलिंग और निरंतर डिजिटल संपर्क जैसे कारकों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख कारणों के रूप में पहचाना गया। इसके विपरीत, शैक्षणिक सहयोग और सामाजिक समर्थन के लिए सोशल मीडिया के संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग से अपेक्षाकृत कम नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव देखे गए। यह अध्ययन दर्शाता है कि यद्यपि सोशल मीडिया सूचना साझा करने और सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग कॉलेज छात्रों के मानसिक कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। शोध में शैक्षणिक संस्थानों के भीतर जागरूकता कार्यक्रमों, डिजिटल साक्षरता पहलों और मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया गया है। संतुलित सोशल मीडिया आदतों को प्रोत्साहित करना और ऑफ़लाइन सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चिंता और अवसाद के स्तरों को कम करने में सहायक हो सकता है। यह अध्ययन डिजिटल व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है और शिक्षकों, नीति-निर्माताओं तथा मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

मुख्य शब्द: इंस्टाग्राम, टिकटॉक, स्नैपचौट, कॉलेज छात्र, स्क्रीन टाइम, मानसिक स्वास्थ्य.


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