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नई शिक्षा नीति 2020 का गांधीवादी विश्लेषणः उच्च शिक्षा में कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता

Authors: डॉ0 गीता पांडे, प्राचार्य, अध्यापक प्रशिक्षण महाविद्यालय गया, बिहार. डॉ0 अभिषेक कुमार, शोधार्थी, मगध विश्वविद्यालय बोधगया, बिहार.   DOI: 10.70650/rvimj.2025v2i800010   DOI URL: https://doi.org/10.70650/rvimj.2025v2i800010
Published Date: 10-08-2025 Issue: Vol. 2 No. 8 (2025): August 2025 Published Paper PDF: Download

सारांश: यह शोध-पत्र नई शिक्षा नीति 2020 का गांधीवादी दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें विशेष रूप से उच्च शिक्षा के संदर्भ में कौशल विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के आयामों पर विचार किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार नई शिक्षा नीति भारतीय शिक्षण व्यवस्था को केवल ज्ञान-आधारित प्रणाली से आगे बढ़ाकर कौशल, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त समग्र शिक्षा की ओर अग्रसर करती है। गांधीजी के Nai Talim, स्वदेशी, स्वावलंबन और ग्राम स्वराज के सिद्धांतों के आलोक में यह विश्लेषण दर्शाता है कि नीति में व्यावसायिक शिक्षा, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, अनुभवात्मक शिक्षण और सतत मूल्यांकन जैसे प्रावधान आत्मनिर्भर नागरिक निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, शोध-पत्र नीति के कार्यान्वयन, संसाधन-संरचना, ग्रामीण असमानताओं तथा बाहरी निर्भरता जैसी चुनौतियों का आलोचनात्मक परीक्षण भी करता है। निष्कर्षतः, यह अध्ययन स्थापित करता है कि यदि नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को गांधीवादी मूल्यों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो यह न केवल रोजगारोन्मुख शिक्षा को सशक्त करेगी, बल्कि सामाजिक समरसता, नैतिक चेतना और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्य शब्द:नई शिक्षा नीति 2020, गांधीवादी दर्शन, आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन, कौशल विकास, रोजगार सृजन, उच्च शिक्षा, Nai Talim, ग्राम स्वराज, स्वदेशी, समग्र शिक्षा, मूल्य आधारित शिक्षा.


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