जनपद पिथौरागढ़ में अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक विकास की प्रवृत्ति के प्रति शैक्षिक अधिकारियों का प्रत्यक्षीकरण
Published Date: 09-10-2024 Issue: Vol. 1 No. 3 (2024): October 2024 Published Paper PDF: Download
सारांश- मनोविज्ञान के अनुसार जनजातीय एक सामाजिक समूह है, जिसमें कई लोग एक साथ निवास करते हैं। एक ऐसा समुदाय जिसकी एक समान बोली हो, एक समान सामाजिक संगठन और राजनीतिक तथा सांस्कृतिक समरूपता व धार्मिक स्वरूप में भी समानता परिलक्षित हो। भारत में अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय समुदायों का विशिष्टीकरण संविधान लागू होने के बाद अनुसूचित जनजाति का अस्तित्व सामने आया। आदिवासी लोग पिछड़े वर्गों में से एक हैं और ऐतिहासिक रूप से भारतीय समाज का वंचित वर्ग। प्रस्तुत आलेख में उत्तराखण्ड राज्य के जनपद पिथौरागढ़ में निवासरत अनुसूचित जनजाति के शैक्षिक विकास के प्रति अधिकारियों के प्रत्यक्षीकरण का अध्ययन किया गया जिसमें जनपद के सम्बन्धित शैक्षिक अधिकारी वर्ग (खण्ड शिक्षा अधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, समग्र शिक्षा अधिकारी व विद्यालय के प्रधानाचार्य/प्राचार्य व प्रवक्ता) को यादृच्छिक न्यादर्श विधि द्वारा आंकडे़ प्राप्त कर पाया गया कि- सम्बन्धित जनजातियों के शैक्षिक विकास की प्रवृत्ति में शैक्षिक योजनाओं व कार्यक्रमों में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है जिससे कि लगभग सभी विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं जो शिक्षा अनुसूचित जनजाति की शिक्षा में एक सफल प्रयास है।
मुख्य शब्द: अनुसूचित जनजाति, प्रत्यक्षीकरण, शैक्षिक विकास