महात्मा ज्योतिबा फुले का नारी शिक्षा: एक अवलोकन
Published Date: 08-10-2024 Issue: Vol. 1 No. 3 (2024): October 2024 Published Paper PDF: Download
सारांश- महात्मा ज्योतिबा फुले भारतीय समाज में स्त्री शिक्षा के अग्रदूत थे। उन्होंने 19वीं शताब्दी में उस समय नारी शिक्षा का बीड़ा उठाया जब समाज में स्त्रियों को अंधकार, अज्ञान और पराधीनता में रखा गया था। फुले का मानना था कि किसी भी समाज की उन्नति तभी संभव है जब महिलाएँ शिक्षित हों, क्योंकि शिक्षित नारी ही परिवार और समाज को सही दिशा दे सकती है। उन्होंने 1848 में अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर पुणे में भारत का पहला कन्या विद्यालय स्थापित किया। फुले का विचार था कि अज्ञान ही स्त्रियों के शोषण की जड़ है, और शिक्षा उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाती है। उन्होंने स्त्री-पुरुष समानता का संदेश दिया और बाल विवाह, पर्दा प्रथा तथा जातिगत भेदभाव के विरोध में आवाज़ उठाई। फुले की नारी शिक्षा संबंधी पहल ने आगे चलकर भारतीय समाज में सामाजिक सुधार आंदोलनों को दिशा दी। संक्षेप में, महात्मा फुले का नारी शिक्षा आंदोलन भारतीय समाज में जागरूकता, समानता और प्रगतिशील सोच की नींव रखने वाला ऐतिहासिक कदम था।
मुख्य शब्द - कृषक, सामाजिक न्याय, शोषण की जड़, ब्राह्मणवादी व्यवस्था, गुलामगिरी, नारी सशक्तिकरण, दलित उत्थान।